मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण बाघ कॉरिडोर के निकट एक और कोयला खनन परियोजना को पर्यावरणीय मंजूरी मिल गई है। पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एक्सपर्ट कमेटी) ने पिथोरा ईस्ट अंडरग्राउंड कोल माइनिंग ब्लॉक (सोहागपुर कोलफील्ड) के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्रदान कर दी है।
जानकारी के अनुसार, यह कोल ब्लॉक बांधवगढ़-अचानकमार टाइगर कॉरिडोर से करीब 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस परियोजना को मंजूरी देने का निर्णय विशेषज्ञ समिति की 27 जुलाई को आयोजित बैठक में लिया गया।
पहले भी दो परियोजनाओं को मिल चुकी है सिफारिश
इससे पहले 8 और 9 जुलाई को हुई बैठकों में विशेषज्ञ समिति ने मरवटोला-सात कोल ब्लॉक और अर्जुन वेस्ट कोल ब्लॉक को भी पर्यावरणीय मंजूरी देने की सिफारिश की थी।
इनमें मरवटोला-सात कोल ब्लॉक टाइगर कॉरिडोर से महज 53 मीटर और अर्जुन वेस्ट कोल ब्लॉक करीब 3.9 मीटर की दूरी पर स्थित है। अब तीसरे कोल ब्लॉक को भी मंजूरी मिलने के बाद इस क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
महत्वपूर्ण है बाघ कॉरिडोर
बांधवगढ़ और अचानकमार टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाला यह कॉरिडोर बाघों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे कॉरिडोर वन्यजीवों के आवासों को आपस में जोड़ने और जैव विविधता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद अब इन परियोजनाओं के प्रभाव को लेकर वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण के क्षेत्र में चर्चा बढ़ने की संभावना है। वहीं, परियोजनाओं से जुड़े सभी कार्य निर्धारित पर्यावरणीय शर्तों और नियामकीय प्रक्रियाओं के तहत किए जाएंगे।
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