सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम पर कंटेंट दिखाने के तरीके को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय यानी MeitY ने इन दोनों प्लेटफॉर्म की मूल कंपनी मेटा को अपने कंटेंट रिकमेंडेशन और रैंकिंग सिस्टम की समीक्षा करने की सलाह दी है। सरकार चाहती है कि यूजर्स को किसी एक या सीमित विचारधारा से जुड़ी सामग्री ही बार-बार न दिखाई जाए, बल्कि उन्हें प्रासंगिक और विश्वसनीय जानकारी के विविध विकल्प मिलें।
मंत्रालय ने 10 अक्टूबर 2026 को जारी एडवाइजरी में मेटा से कहा है कि उसके एल्गोरिदम के कारण किसी खास नैरेटिव को जरूरत से ज्यादा बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। साथ ही, भ्रामक, छेड़छाड़ किए गए या संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किए गए कंटेंट को बार-बार यूजर्स तक पहुंचने से रोकने के लिए व्यवस्था मजबूत की जाए।
कंटेंट प्रमोशन सिस्टम की समीक्षा के निर्देश
सरकार के मुताबिक, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी पोस्ट की पहुंच केवल उसके मूल कंटेंट पर ही नहीं, बल्कि रिकमेंडेशन एल्गोरिदम पर भी निर्भर करती है। यही सिस्टम तय करने में भूमिका निभाता है कि यूजर को कौन-सी तस्वीरें, वीडियो, पोस्ट और अन्य सामग्री ज्यादा दिखाई देगी।
मंत्रालय ने मेटा से अपने रिकमेंडेशन और कंटेंट रैंकिंग सिस्टम की समीक्षा करने को कहा है, ताकि भ्रामक या अधूरी जानकारी को असमान रूप से ज्यादा प्रचार न मिले। इसके अलावा, तेजी से वायरल हो रहे ऐसे कंटेंट की पहचान, समीक्षा और जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई के लिए तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे सार्वजनिक भ्रम, हिंसा या कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा हो सकता है।
पुराने वीडियो और भ्रामक तस्वीरों पर भी नजर
एडवाइजरी में सार्वजनिक घटनाओं से जुड़ी तस्वीरों, वीडियो और ग्राफिक्स को लेकर भी चिंता जताई गई है। सरकार ने कहा है कि जब किसी सामग्री की तारीख, स्थान, प्रामाणिकता या वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट न हों, तो उसके साथ पर्याप्त संदर्भ उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए।
इसमें पुराने वीडियो को मौजूदा घटना बताकर प्रसारित करना, चुनिंदा हिस्सों को संपादित करके दिखाना और आपातकालीन परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई या सरकारी आदेशों को लेकर अपुष्ट दावे फैलाना जैसे मामले शामिल हैं।
मंत्रालय ने मेटा को ऐसे कंटेंट की पहचान और समीक्षा की प्रक्रिया तेज करने के लिए भी कहा है, जो रिकमेंडेशन सिस्टम के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच रहा हो और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता हो।
कानून के तहत सहयोग करने की अपेक्षा
सरकार ने एडवाइजरी में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और आईटी नियम, 2021 के तहत प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों का उल्लेख किया है। मेटा से कानून के अनुसार अधिकृत सरकारी एजेंसियों और कानून प्रवर्तन संस्थाओं के साथ समय पर सहयोग करने को भी कहा गया है।
मंत्रालय ने इन उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने और उठाए गए कदमों की जानकारी देने की अपेक्षा जताई है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी चर्चा
इस एडवाइजरी के बाद सोशल मीडिया पर कंटेंट मॉडरेशन, एल्गोरिदम की पारदर्शिता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस की गुंजाइश भी बढ़ गई है। सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य जिम्मेदारी से सूचना का प्रसार सुनिश्चित करना और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े जोखिमों को कम करना है। साथ ही, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई लागू कानूनों के अनुरूप होनी चाहिए और वैध अभिव्यक्ति तथा सार्वजनिक विमर्श का सम्मान किया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह कदम सोशल मीडिया पर कंटेंट की पहुंच तय करने वाले एल्गोरिदम की भूमिका को लेकर बढ़ती निगरानी का संकेत है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेटा अपनी रिकमेंडेशन प्रणाली में क्या बदलाव करता है और इन बदलावों का यूजर्स को दिखाई देने वाले कंटेंट पर क्या प्रभाव पड़ता है।
#Meta #Facebook #Instagram #SocialMedia #MeitY #ContentPromotion #Algorithm #DigitalMedia #ITRules2021 #FreeSpeech #IndiaNews #मेटा #फेसबुक #इंस्टाग्राम #केंद्रसरकार






