नई दिल्ली से सरकारी सेवा और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी के एक परिवीक्षाधीन कनिष्ठ खुफिया अधिकारी की सेवा समाप्त करने के फैसले को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी कैट ने बरकरार रखा है। अधिकारी ने अपनी सेवा समाप्ति को चुनौती देते हुए बहाली की मांग की थी, लेकिन अधिकरण ने उनकी याचिका खारिज कर दी।
मामला एनसीबी के कनिष्ठ खुफिया अधिकारी विशाल कुंडारा से जुड़ा है। 29 वर्षीय कुंडारा अक्टूबर 2023 में एजेंसी में शामिल हुए थे। उनकी शुरुआती तैनाती चेन्नई में थी। बाद में उनके आचरण और कार्यप्रणाली से जुड़ी चिंताओं के आधार पर उन्हें गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय स्थानांतरित किया गया। इसके बाद उन्हें नागालैंड के दीमापुर स्थित एनसीबी कार्यालय से संबद्ध किया गया।
एनसीबी ने मार्च 2026 में उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया था। एजेंसी के अनुसार, अधिकारी के व्यवहार, अनुशासन और कामकाज को लेकर लगातार चिंताएं सामने आई थीं। विभाग का कहना था कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद उनके आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
अधिकारी ने फैसले को दी थी चुनौती
सेवा समाप्ति के आदेश के खिलाफ विशाल कुंडारा ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की गुवाहाटी पीठ में याचिका दायर की थी। उन्होंने दलील दी कि विभागीय जांच किए बिना उनकी सेवा समाप्त कर दी गई। उन्होंने आदेश रद्द करने और सेवा में बहाल किए जाने की मांग की थी।
एनसीबी ने अधिकरण के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि परिवीक्षाधीन कर्मचारी की सरकारी सेवा के लिए उपयुक्तता का आकलन करना विभाग का अधिकार है। यदि अधिकारी का प्रदर्शन और आचरण संतोषजनक नहीं पाया जाता, तो लागू नियमों के अनुसार उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।
कैट ने क्या कहा?
सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में दिए गए आदेश में कैट की गुवाहाटी पीठ ने कहा कि 30 मार्च 2026 का सेवा समाप्ति आदेश अधिकारी के प्रदर्शन, आचरण और सरकारी सेवा के लिए उनकी समग्र उपयुक्तता के आकलन के बाद जारी किया गया था। अधिकरण ने इसे कानूनी और लागू नियमों के अनुरूप माना।
अधिकरण ने यह भी माना कि आदेश दंडात्मक कार्रवाई के रूप में जारी नहीं किया गया था। ऐसे में मामले की परिस्थितियों में औपचारिक विभागीय अनुशासनात्मक जांच की आवश्यकता संबंधी अधिकारी की दलील स्वीकार नहीं की गई।
कैट के अनुसार, अधिकारी अपने आचरण को लेकर उठाई गई चिंताओं और विभाग के पास मौजूद सामग्री का संतोषजनक जवाब देने में सफल नहीं रहे। अधिकरण ने उनकी याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया।
इस फैसले के साथ एनसीबी की ओर से की गई सेवा समाप्ति की कार्रवाई को न्यायिक चुनौती में राहत नहीं मिली। यह मामला सरकारी सेवा में परिवीक्षा अवधि के दौरान कर्मचारी के आचरण, कार्यप्रदर्शन और नियुक्ति की पुष्टि के लिए निर्धारित मानकों के महत्व को भी सामने लाता है।
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