अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच तेहरान की सत्ता संरचना को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दावा किया गया है कि Islamic Revolutionary Guard Corps अब केवल सैन्य संगठन नहीं रह गया, बल्कि ईरान की वास्तविक सत्ता का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की भूमिका सीमित होती दिखाई दे रही है, जबकि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी माने जा रहे मोजतबा खामेनेई तक पहुंच भी काफी नियंत्रित बताई जा रही है।
क्या पाकिस्तान जैसा मॉडल बन रहा है?
विश्लेषकों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या ईरान भी पाकिस्तान की तरह “सैन्य-प्रभुत्व वाली व्यवस्था” की ओर बढ़ रहा है, जहां सेना का राजनीतिक और रणनीतिक मामलों में अत्यधिक प्रभाव होता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की स्थिति पाकिस्तान से अलग और अधिक जटिल है। उनका कहना है कि ईरान में सेना, धर्मतंत्र और सुरक्षा एजेंसियां पहले से ही गहराई से एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में IRGC का बढ़ता प्रभाव केवल सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में जारी तनाव, परमाणु विवाद और सुरक्षा चुनौतियों के बीच IRGC की भूमिका लगातार मजबूत होती दिख रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सत्ता का संतुलन और अधिक सैन्य-सुरक्षा ढांचे की ओर झुकता है, तो इसका असर ईरान की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी पड़ सकता है।
हालांकि ईरानी सरकार की ओर से इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
#Iran #IRGC #Tehran #MiddleEast #IranPolitics #Khamenei #USIran #WorldNews #InternationalNews #HindiNews








