भारतीय चावल निर्यात क्षेत्र को लगातार दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय झटका लगा है। पहले जापान ने भारत की प्रीमियम चावल किस्मों के आयात पर रोक लगाई और अब चीन ने भी भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेपों पर सख्ती बढ़ा दी है। चीन अब तक भारत से भेजी गई करीब 70 खेपों को वापस कर चुका है।
सूत्रों के अनुसार, चीन ने भारतीय नॉन-बासमती चावल में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) पाए जाने का दावा करते हुए इन खेपों को अस्वीकार किया है। बताया जा रहा है कि बीते कुछ महीनों में चीन लगातार भारतीय निर्यातकों की खेपों की जांच कड़ी कर रहा है और कई शिपमेंट्स को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
हालांकि भारत सरकार ने चीन के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए साफ कहा है कि देश से निर्यात होने वाले चावल तय गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप हैं। सरकार का कहना है कि भारतीय कृषि उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सख्त निगरानी व्यवस्था लागू है।
दूसरी ओर, जापान द्वारा भारतीय प्रीमियम किस्मों के आयात पर रोक लगाए जाने से निर्यातकों की चिंता और बढ़ गई है। जापान का फैसला ऐसे समय आया है जब भारत वैश्विक चावल बाजार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और जापान जैसे बड़े बाजारों में आई यह रुकावट भारतीय निर्यातकों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। खासतौर पर नॉन-बासमती चावल व्यापार से जुड़े कारोबारी और किसान प्रभावित हो सकते हैं।
निर्यात क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो भारतीय चावल की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार अब इस मुद्दे को कूटनीतिक और व्यापारिक स्तर पर उठाने की तैयारी में है।
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