गाजियाबाद में सपा नेता हाजी खलील ने 50 साल छोटी लड़की से चौथा निकाह कर लिया है। उनकी उम्र 70 साल है। लड़की की सिर्फ उम्र 20 साल है। तीन पत्नियों से उनके 11 बच्चे हैं। सपा नेता के इस निकाह से उनकी दूसरी पत्नी नाजरीन नाराज हैं।
नाजरीन मंगलवार को बेटे के साथ कमिश्नर ऑफिस पहुंचीं। एडिशनल पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत दी। नाजरीन ने कहा- पति हर पत्नी से बच्चे पैदा करता है, फिर कुछ समय बाद छोड़ देता है या घर से निकाल देता है। अब 20 साल की लड़की से निकाह करके उसे घर ले आया है।
उन्होंने बताया- मैंने पुलिस से शिकायत की तो मुझे मारने की धमकी दी गई, इसलिए यहां आई हूं। एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हाजी खलील सपा से दो बार पार्षद रह चुके हैं। पूरा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।
दूसरी पत्नी बोली- मुझे और मेरे बेटे को घर से निकाला
सपा नेता हाजी खलील कोतवाली थाना क्षेत्र के कैला भट्टा मोहल्ले में रहते हैं। वह 1995 और 2000 में इस्लामनगर से दो बार पार्षद चुने जा चुके हैं। उन्होंने 1988 में पहला निकाह किया था। पहली पत्नी से उनके 8 बच्चे हैं। बाद में उन्होंने पहली पत्नी को छोड़ दिया। पहली पत्नी अपने बच्चों के साथ अलग रहने लगी।
नाजरीन ने बताया कि साल 1998 में हाजी खलील ने मेरे साथ दूसरा निकाह किया। निकाह से पहले मुझे उनकी पहली पत्नी और बच्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी। निकाह के बाद जब मैं घर आई, तो कुछ समय बाद मुझे हाजी खलील की पहली शादी के बारे में पता चला। मुझसे उनके तीन बच्चे हैं- दो बेटियां और एक बेटा।
नाजरीन ने बताया कि साल 2010 में हाजी खलील ने तीसरा निकाह किया। इस पत्नी से कोई संतान नहीं हुई। बाद में उन्होंने तीसरी पत्नी को तीन तलाक देकर अलग कर दिया। वह अब दिल्ली में रह रही हैं। अब उन्होंने 20 साल की यासमीन से चौथा निकाह किया है।
नाजरीन का आरोप है कि यासमीन की नजर खलील की संपत्ति पर है। खलील भी संपत्ति उसके नाम करना चाहता है। वह मुझे अलग मकान में रखे हुए था। जब मुझे इस बारे में पता चला और मैंने विरोध किया, तो उसने मुझे और मेरे बेटे को घर से निकाल दिया।
हाजी पर 30 करोड़ की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप लगा था
हाजी खलील पर गाजियाबाद के कैला भट्टा इलाके में करीब 30 करोड़ रुपये की नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगा था। आरोप है कि उन्होंने इस जमीन पर अवैध रूप से मदरसा, मस्जिद और दुकानें बनवाई थीं, जिन्हें बाद में पट्टे पर दे दिया गया।
नगर निगम को शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच की गई और अवैध मदरसे व दुकानों को खाली करने का नोटिस जारी किया गया था। इस जमीन से अवैध पार्किंग और पानी के प्लांट को हटा दिया गया था। हालांकि, उस समय धार्मिक स्थल को नहीं हटाया गया। उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी।























