बांग्लादेश की राजनीति और दक्षिण एशिया की कूटनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। खबर है कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री Tarique Rahman जून के आखिर में चीन दौरे पर जा सकते हैं। खास बात यह है कि बीएनपी सरकार बनने के बाद यह उनकी पहली विदेश यात्रा होगी।
शुरुआती चर्चा में उनकी पहली विदेश यात्रा के लिए Bhutan का नाम सामने आया था, लेकिन अब चीन यात्रा को प्राथमिकता दिए जाने के संकेत मिल रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, उन्होंने अभी तक भारतीय प्रधानमंत्री Narendra Modi का न्योता भी स्वीकार नहीं किया है।
तारिक रहमान की संभावित चीन यात्रा को लेकर नई दिल्ली में काफी बारीकी से नजर रखी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह चीन और बांग्लादेश के बीच बढ़ती रणनीतिक नजदीकियां मानी जा रही हैं।
दरअसल, ढाका लंबे समय से अटके हुए तीस्ता नदी बहाली प्रोजेक्ट के लिए चीन से फंडिंग हासिल करने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि चीन इस प्रोजेक्ट में निवेश कर बांग्लादेश में अपनी रणनीतिक पकड़ और मजबूत करना चाहता है।
तीस्ता नदी का मुद्दा पहले से ही भारत और बांग्लादेश के बीच संवेदनशील बना हुआ है। जल बंटवारे को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में अगर चीन इस परियोजना में बड़ी भूमिका निभाता है, तो यह भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक चिंताओं को और बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया में चीन लगातार अपने प्रभाव का विस्तार कर रहा है और बांग्लादेश उसके लिए एक अहम साझेदार बनता जा रहा है। यही वजह है कि तारिक रहमान की संभावित चीन यात्रा को केवल एक राजनयिक दौरा नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि चीन यात्रा के दौरान बांग्लादेश और चीन के बीच कौन-कौन से बड़े समझौते होते हैं और इसका भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या असर पड़ता है।








