ट्रेन के सफर के दौरान अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए, किसी का सामान चोरी हो जाए या कोई अन्य परेशानी हो, तो ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले ‘अलार्म चेन’ खींचने का ही ख्याल आता है। हालांकि, क्या आप जानते हैं कि चेन खींचना हमेशा सही तरीका नहीं होता?
जी हां, बेवजह चेन खींचने पर रेलवे एक्ट के तहत भारी जुर्माना या जेल भी हो सकती है। इसके अलावा, चेन खींचने से ट्रेन जहां-तहां रुक जाती है, जिससे मदद पहुंचने में और ज्यादा समय लग सकता है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की तुरंत मदद के लिए कई बेहद आसान सिस्टम बनाए हैं। आइए जानते हैं चेन खींचने के अलावा इमरजेंसी में आपके पास क्या-क्या विकल्प होते हैं।
यह भारतीय रेलवे का वन स्टॉप सॉल्यूशन नंबर है। सफर के दौरान अगर कोई भी मेडिकल इमरजेंसी हो या सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या आए, तो तुरंत अपने फोन से 139 डायल करें। आपकी कॉल सीधे रेलवे के कंट्रोल रूम में जाएगी। आपको बस अपना पीएनआर नंबर और परेशानी बतानी है। ट्रेन के अगले स्टेशन पर पहुंचने से पहले ही डॉक्टर या पुलिस आपकी मदद के लिए प्लेटफॉर्म पर तैयार मिलेगी।
TTE और RPF जवानों से लें सीधी मदद
हर लंबी दूरी की एक्सप्रेस और मेल ट्रेन में TTE और रेलवे सुरक्षा बल के जवान मौजूद होते हैं। किसी भी एमर्जेंसी में आप तुरंत उन्हें ढूंढकर अपनी परेशानी बता सकते हैं। इन कर्मचारियों के पास वॉकी-टॉकी होता है, जिससे वे सीधे ट्रेन के गार्ड, ड्राइवर या अगले स्टेशन के स्टेशन मास्टर को मैसेज भेजकर आपके लिए तुरंत मदद की व्यवस्था कर सकते हैं।
सोशल मीडिया की ताकत
अगर आप इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ बहुत काम आ सकता है। आप अपनी समस्या, ट्रेन नंबर, कोच और PNR नंबर लिखकर @RailwaySeva को टैग करके पोस्ट कर दें। रेलवे का सोशल मीडिया सेल 24 घंटे एक्टिव रहता है। कुछ ही मिनटों में आपको वहां से रिप्लाई आ जाएगा और आपकी सीट तक मदद पहुंचाई जाएगी।
नई ट्रेनों में ‘इमरजेंसी टॉक-बैक’ बटन
रेलवे अब तेजी से बदल रहा है। अगर आप वंदे भारत, नई ईएमयू या मेट्रो ट्रेनों में सफर कर रहे हैं, तो वहां पुरानी जंजीर की जगह ‘इमरजेंसी टॉक-बैक’ बटन दिए गए हैं। इसे दबाने पर ट्रेन रुकती नहीं है, बल्कि आपकी बात सीधे ट्रेन के लोको पायलट या गार्ड से हो जाती है। आप उन्हें अपनी परेशानी बता सकते हैं और वे तुरंत स्थिति को संभाल लेते हैं।






