नेपाल की राजनीति से इस वक्त बड़ी खबर सामने आई है। Sher Bahadur Deuba और उनकी पत्नी Arzu Rana Deuba को नेपाल के सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोनों की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।
नेपाल सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस महेश शर्मा पौडेल और नित्यानंद पांडे की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए काठमांडू जिला अदालत द्वारा जारी गिरफ्तारी वारंट पर सवाल उठाए।
दरअसल, काठमांडू जिला अदालत ने 6 अप्रैल को देउबा दंपती के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। उस समय दोनों 26 फरवरी से चिकित्सा उपचार के लिए विदेश में थे। इसके बाद नेपाल पुलिस ने इंटरपोल से भी देउबा और उनकी पत्नी के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया था।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान पाया कि गिरफ्तारी वारंट जारी करते समय उचित कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था। इसी आधार पर अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक देउबा दंपती को गिरफ्तार न किया जाए।
Nepal की राजनीति में शेर बहादुर देउबा एक बड़ा नाम माने जाते हैं। वे कई बार नेपाल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। वहीं उनकी पत्नी अर्चु राणा देउबा नेपाल की पूर्व विदेश मंत्री भी रह चुकी हैं और देश की प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों में गिनी जाती हैं।
इस मामले ने नेपाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर आने वाले दिनों में नेपाल की राजनीतिक और कानूनी परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि अदालत की अगली सुनवाई में क्या फैसला आता है और मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।








